Monday, June 27, 2022
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रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध से आसमान में पहुंची कच्चे तेल की कीमतें, भारतीयों की जेब पर पड़ सकता है सीधा असर

सरकारी तेल कंपनियों पर पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है.

नई दिल्ली:

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर संकट का साया गहराता जा रहा है. बुधवार को रूस से तेल के आयात पर प्रतिबन्ध लगाने के अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले के बाद अंतरष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 131 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गयी. महंगा होते कच्चे तेल की वजह से भारतीय तेल कंपनियों पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ता जा रहा है.

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बता दें कि बुधवार को एक समय कच्चे तेल का ब्रेंट क्रूड इंडेक्स 131.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड आयल फ्यूचर पिछले 13 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है. रूस सऊदी अरब के बाद कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा प्रोडूसर है, लेकिन प्रतिबंधों की वजह से क्रूड आयल सप्लाई नहीं कर पा रहा है. कच्चा तेल महंगा होने से भारत का तेल आयात बिल बढ़ता जा रहा है.

बुधवार को इकनोमिक फोरकास्टिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने आगाह किया कि यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से भारत का चालू खाता घाटा इस साल की तीसरी तिमाही में बढ़कर 23.6 बिलियन डॉलर (GDP का 2.8%) पहुंचने की आशंका है. ये पिछले 13 तिमाही में सबसे ज्यादा है. मार्च 2022 में डॉलर के मुकाबले रुपये की औसत कीमत 76 तक रहने का अंदेशा है.

इसके साथ ही सरकारी तेल कंपनियों पर पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है. पूरे देश में चुनावी अभियान के दौरान पिछले 4 नवंबर और दिल्ली में 1 दिसंबर, 2021 के बाद पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सूत्रों के मुताबिक पिछले 4 महीने में कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 12 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी की ज़रुरत होगी.

अगर सरकार तेल के रिजर्व स्टॉक से कच्चा तेल की सप्लाई बढ़ाती है तो कीमतों में कम बढ़ोतरी करने की जरूरत पड़ेगी. पेट्रोल डीजल पर एक्साइज और VAT में कटौती भी एक विकल्प है. कमोडिटीज के इकोनॉमिक डी के मिश्रा ने एनडीटीवी से कहा, “अगर ऐसे ही क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती रही तो भारत में भी निश्चित तौर पर तेल की कीमतें बढ़ायी जाएगी, इसका व्यापक प्रभाव पूरी इकॉनमी पर होगा. इसका असर इन्फ्लेशनरी होगा, महंगाई दर बढ़ेंगी और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेग.”

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